mohabbat ki tadap kavita

Mohabbat ki Tadap par Kavita – मोहब्बत की तड़प पर कविता

इस पोस्ट में आपके लिए है Mohabbat ki Tadap par Kavita। कृपया पूरी पढ़े।

 

mohabbat ki tadap kavita

नाज़ क्यों न करूँ अपनी तकदीर पे
मिल गया जब मुझे तुमसा प्यारा सनम ||

कुछ खुदा की भी होंगी मेहरबानियां
और कुछ होंगे मेरे भी अच्छे करम ||

शीशे-ए-दिल में तेरी ही तस्वीर है
तू मेरा प्यार है मेरी तकदीर है ||

जाने जाना तुझे प्यार करता हूँ मैं
कसम तेरी तुझी पर तो मरता हूँ मैं ||

दिल की धड़कन में हर दम तेरा नाम है
तू सुहानी सहर सावंली शाम है ||

यूँ भी अनजान न बन तू सब जान कर
है अगर प्यार मुझसे तो इकरार कर ||

लाख दीवाने मिल जायेंगे हर डगर
दिल की चाहत न होगी किसी को मगर ||

प्यार होगा ना उनकी नजर में कभी
होंगे जिस्म के दीवाने सभी के सभी ||

अगर यकीं ना हो तो फिर कभी देख ले
आजमा कर किसी को मेरा जरा देख ले ||

बात का तुझ को मेरा यकीं आएगा
तब भरम ये तुम्हारा निकल जायेगा ||

धड़कनो से सदायें ये तब आएंगी
मैं तुम्हारा हूँ तुम्हे ऐतबार आएगा ||

रातें कैसे गुजरती है कैसे कहूं
कातिलाना जुदाई मैं हर दम सहूँ ||

जिस्म है दो मगर जान है एक हम
तू है मुझमे समायी मैं हूँ तुझमे सनम ||

पास दिल है सदा फिर भी हैं दूरियां
कुछ तुम्हारी कुछ मेरी मजबूरियां ||

याद आकर सताती है हर दम तेरी
काश तू देख पाती ये हालत मेरी ||

राहें तेरी अलग , राहें मेरी जुदा
कौन जाने कि क्या चाहता है खुदा ||

तुम भी मजबूर हो मैं भी मजबूर हूँ
मुझ से तुम दूर हो तुमसे मैं दूर हूँ ||

दिल हमारे बहले ही मिले हो मगर
तड़पना है हमें यूँ ही उम्र भर ||

चाह कर भी ना मिल पाएंगे हम कभी
लिख चुका है खुदा ज़िन्दगी में यही ||

इसलिए ये दुआ कर रहा हूँ सनम
हो खुदा का करम फिर मिले एक जनम ||

 

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